कोरोनावायरस के चलते अमेरिका में फंसे हजारों भारतीयों को बड़ी राहत मिलेगी। अमेरिकी सरकार ने एच-1बी वीजा धारकों का वीजा विस्तार करने का फैसला किया है। सरकार ने ऐसे एच-1बी वीजा धारकों से आवेदन मांगे हैं, जिनका वीजा परमिट खतम हो रहा है। ये लोग कोरोनावायरस के चलते देश से निकल नहीं पाए हैं। ऐसे लोगों को रुकने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
ट्रम्प प्रशासन ने क्या कहा?
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब दुनिया के लगभग सभी देशों ने अपने बाॅर्डर बंद कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानें भी फिलहाल रोक दी गई हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी (डीएचएस) ने नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक, कोरोनावायरस महामारी के कारण इमीग्रेशन संबंधी चुनौतियां आई हैं। यात्रा प्रतिबंधों की वजह से अमेरिका में बहुत से ऐसे एच-1 बी वीजा धारक फंस गए हैं, जिनका वीजा परमिट जल्द ही समाप्त होने वाला है। डीएचस की ओर बताया गया कि ऐसे लोग जल्द ही वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन कर दें। ताकि उनका वीजा विस्तार किया जा सके। डीएचएस की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया है, ‘‘हम इन मामलों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। इस महामारी के दौर में हम अमेरिकी लोगों के साथ अपने कामगारों को रोजगार के अवसर देने के लिए कई नीतियों पर काम कर रहे हैं।’’ अगर एच-1 बी वीजा होल्डर तय सीमा में एक्सटेंशन के लिए आवेदन नहीं करता तो देश में उसकी मौजूदगी गैरकानूनी मानी जाएगी।
क्या है एच-1बी वीजा?
एच-1 बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के जरिए करती हैं। नियम के अनुसार, अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है। तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। भारतीय आईटी वर्कर्स इस 60 दिन की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने की मांग कर रहे हैं। यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के मुताबिक, एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।